नई दिल्ली: साल 2025 भारत के लिए उपलब्धियों से भरा रहा। भारतीयों ने अंतरिक्ष, वैश्विक मंच, खेल के साथ-साथ तमाम क्षेत्रों में देश का नाम रोशन किया है। चाहे भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की आईएसएस से सुरक्षित वापसी हो, गणित प्रतिभा आर्यन शुक्ला के रिकॉर्ड हो, महिला क्रिकेट विश्वकप में जीत या दिव्या देशमुख की ऐतिहासिक शतरंज जीत के साथ-साथ स्क्वैश में अनाहत सिंह का वर्ल्ड कप गोल्ड- ये सभी पल भारत की ताकत और आत्मविश्वास को दिखाते हैं।
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के 15 दिन बाद भारतीय सेना ने सात मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकी ठिकानों को तबाह किया था। जिसमें कई कुख्यात आतंकी भी मारे गए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच हालात बिगड़े और दो दशक बाद चरम पर पहुंच गए। वहीं पाकिस्तान की तरफ से भारत के शहरों को निशाना बनाए जाने के बाद, भारत की वायु रक्षा प्रणाली ने सभी को नाकाम करते हुए उसका माकूल जवाब दिया। भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के 14 सैन्य ठिकानों को ध्वस्त कर दिए। इससे घबराए पाकिस्तान ने भारत के सामने सीजफायर का प्रस्ताव रखा, जिसे दोनों देशों ने आपसी चर्चा के बाद लागू कर लिया।
साल 2025 की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह रही कि पहली बार कोई भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर पहुंचा। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला दिवंगत अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय हैं। इसरो के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला एक्सिओम-4 मिशन के तहत आईएसएस गए। उन्होंने करीब 18 दिन अंतरिक्ष में बिताए और कई तरह से प्रयोग किए। उनकी इस उपलब्धि से पूरा देश बहुत गौरवान्वित हुआ।
साल 2025 में भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान क्षेत्र में कई बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं हैं। इस वर्ष भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 200 से ज्यादा सफल अंतरिक्ष मिशन पूरे किए। इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने बताया कि 2015 से 2025 के बीच जितने मिशन हुए वे 2005 से 2015 के मुकाबले लगभग दोगुने हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनवरी 2025 से अब तक 200 से अधिक बड़ी उपलब्धियां हासिल की गईं।
इसरो ने इस साल के आखिरी मिशन के साथ ही बुधवार (24 दिसंबर, 2025) को इतिहास रचते हुए सबसे भारी संचार उपग्रह ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इस मिशन के तहत अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल के 6100 किलो वजनी ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 संचार उपग्रह को 520 किलोमीटर दूर स्थित पृथ्वी की निचली कक्षा में 16 मिनट में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। इसकी लॉन्चिंग के लिए एलवीएम3 रॉकेट का इस्तेमाल किया गया, जिसे इसकी क्षमताओं के चलते ‘बाहुबली’ रॉकेट भी कहा जाता है।
इससे पहले 2 नवंबर, 2025 को एलवीएम3-एम5/सीएमएस-03 मिशन के दौरान इसरो ने सी25 क्रायोजेनिक अपर स्टेज के इन-आर्बिट इग्निशन का सफल परीक्षण किया। इससे यह साबित हुआ कि भारत क्रायोजेनिक रॉकेट तकनीक में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी साल भारत ने रॉकेट इंजन और क्रायोजेनिक तकनीक में भी बड़ी प्रगति की। 28 मार्च 2025 को इसरो ने अपने सेमी-क्रायोजेनिक इंजन (एसई2000) का सफल ‘हॉट टेस्ट’ किया। इससे भारत की रॉकेट तकनीक और ज्यादा मजबूत हुई।
भारत को पहले सौर मिशन आदित्य-एल1 से भी बड़ी उपलब्धि मिली। यह मिशन सूर्य-पृथ्वी एल1 बिंदु पर स्थित है। इसरो ने इस मिशन से जुड़ा लगभग 15 टेराबाइट वैज्ञानिक डेटा दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए जारी किया। यह डेटा सूर्य और अंतरिक्ष-मौसम अनुसंधान को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। इसी साल इसरो और नासा ने मिलकर निसार (एनआईएसएआर) नाम का एक खास पृथ्वी अवलोकन उपग्रह लॉन्च किया। यह दुनिया का पहला रडार इमेजिंग सैटेलाइट है, जो दो अलग-अलग फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करता है। यह उपग्रह भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी, भूस्खलन, बर्फ की चादरों के पिघलने और पर्यावरण में हो रहे बदलावों का अध्ययन करेगा।
29 जनवरी 2025 को इसरो ने श्रीहरिकोटा से 100वां रॉकेट प्रक्षेपण किया। इस मिशन में जीएसएलवी-एफ15 रॉकेट के जरिए एनवीएस-02 उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजा गया। इसे जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। हालांकि इसके ऑर्बिट बढ़ाने वाले इंजन में थोड़ी समस्या आई, जिससे यह तय कक्षा में नहीं पहुंच पाया, फिर भी यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक मिशन रहा। इस साल जनवरी में भारत ने स्पैडेक्स (स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट) के तहत अंतरिक्ष में दो उपग्रहों को सफलतापूर्वक जोड़ा। 16 जनवरी 2025 को इसरो ने स्पैडेक्स के दो उपग्रह एसडीएक्स-01 और एसडीएक्स-02 को डॉक किया। इसके साथ ही भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया। यह सफलता भविष्य में चंद्रमा पर मानव भेजने और अंतरिक्ष स्टेशन बनाने के लिए बहुत जरूरी है।
महिला क्रिकेट विश्व कप- भारत की बेटियां विश्व चैंपियन
भारत में 30 सितंबर को महिला क्रिकेट विश्व कप की शुरुआत हुई और इसी के साथ शुरू हुआ भारत की बेटियों का यज्ञ। देश की बेटियों ने जिस तरह की मेहनत क्रिकेट के मैदान पर की, उसे किसी यज्ञ से कम नहीं कहा जा सकता। क्योंकि दुनिया के सामने 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करना और कभी जीत तो कभी हार का सामना करने के बाद फिर से तैयार होना आसान बिल्कुल नहीं है। देश की बेटियों ने खूब मेहनत की और उसका फल मैदान व मुकाबलों में देखने को भी मिला, लेकिन फिर लगातार तीन मैच की हार ने देशवासियों को हतोत्साहित कर दिया। लेकिन जिनका हौसला बुलंद वो थीं देश की बेटियां, जो एक बार फिर विजय अभियान पर निकलीं।
तीन हार के बाद भारत की बेटियों का सामना न्यूजीलैंड की मजबूत टीम से हुआ और ये मैच करो या मरो की स्थिति वाला था, जिसमें बेटियों ने हर क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन किया। भारत के लिए प्रतिका रावल और स्मृति मंधाना ने शतकीय पारी खेली तो मध्यक्रम में जेमिमा रॉड्रिक्स ने शानदार 76 रन बनाए। वहीं गेंदबाजी में भी बेटियों ने न्यूजीलैंड के खिलाड़ियों पर पूरा दबदबा बनाए रखा। बारिश से बाधित इस मैच को भारत ने 53 रनों से जीता और सेमीफाइनल का टिकट पक्का किया। सेमीफाइनल में भारत का मुकाबला सात बार कि विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलियाई टीम से था। इस मुकाबले के हर तरह से शानदार होने की उम्मीद भी थी और ऐसा हुआ भी। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए देश की बेटियों के सामने पहाड़ जैसा 338 रनों का लक्ष्य खड़ा किया। भारत की बेटियों ने भी खूब दमखम दिखाया, सांस रोक देने वाले मुकाबले में भारत ने 338 रनों का विशाल लक्ष्य 48.3 ओवर यानी नौ गेंद शेष रहते हासिल किया और खिताब की ओर एक और कदम बढ़ाया।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम 2017 के बाद फिर फाइनल मुकाबले में पहुंची थी और सामने दक्षिण अफ्रीकी टीम थी, जिन्होंने इंग्लैंड की टीम को हराकर पहली बार फाइनल तक का सफर किया। भारतीय महिला क्रिकेट टीम के फाइनल तक के सफर को लेकर सभी के दिल से एक ही दुआ निकल रही थी कि देश की बेटियां पहली बार विश्व चैंपियन जरूर बने। फिर खिताबी मुकाबले की शुरुआत हुई, भारतीय टीम टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी। सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा ने सधी शुरुआत के आक्रामक रुख अपनाया। स्मृति भले अर्धशतक से चूक गईं, लेकिन शेफाली ने अर्धशतक के बाद भी अपना आक्रामक रुख बरकारार रखा, उनकी पारी 87 रनों पर खत्म हुई। अब जिम्मेदारी मध्यक्रम पर थी, जहां टीम थोड़ी जरूर लड़खड़ाई, लेकिन दीप्ति शर्मा ने माहौल को भांपते हुए बल्लेबाजी की और छोटी-छोटी साझेदारी कर टीम को 298 रन तक पहुंचाया। इसमें रिचा घोष का ताबड़तोड़ 34 रनों का योगदान शामिल है। फिर गेंदबाजी में शेफाली वर्मा और दीप्ति शर्मा के हरफनमौला प्रदर्शन के सामने दक्षिण अफ्रीकी टीम पूरी तरह पस्त दिखी, हालांकि विपक्षी कप्तान ने जरूर शतकीय पारी खेली, लेकिन वो नाकाफी साबित हुआ। और इस तरह से महिला क्रिकेट के 52 वर्षों के इतिहास में भारतीय महिला क्रिकेट टीम पहली बार विश्व चैंपियन बनने का तमगा हासिल किया।