Site icon UK NEWS MIRROR

अजीत डोभाल और वांग यी ने की मुलाकात, भारत-चीन संबंधों को स्थिर बनाने पर जोर

नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने सोमवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ मुलाकात की। इस बातचीत में भारत और चीन के बीच स्थिर, भरोसेमंद और संतुलित संबंधों पर फोकस किया गया। वांग यी ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में भाग लेने के लिए नई दिल्ली आए हैं। बैठक के दौरान डोभाल और वांग यी ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास की स्थिति की भी समीक्षा की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में हाल के घटनाक्रमों पर चर्चा की और माना कि संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में धीरे-धीरे प्रगति हो रही है। उन्होंने बताया कि डोभाल ने कहा कि भारत और चीन के बीच स्थिर और सकारात्मक संबंध दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाने और एक-दूसरे को बेहतर समझने में मदद करते हैं। जायसवाल ने कहा कि डोभाल और वांग यी के बीच हुई बातचीत रचनात्मक रही और भविष्य को ध्यान में रखकर की गई। भारतीय पक्ष की ओर से इस बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री, भारत के चीन में राजदूत विक्रम दुरईस्वामी और लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब भारत इस समय ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता कर रहा है और राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार और मंगलवार को उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक की मेजबानी कर रहा है। यह चर्चा इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली और बीजिंग दोनों ही पिछले कुछ वर्षों के तनाव के बाद अपने संबंधों को स्थिर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
साल 2020 में सीमा पर हुई झड़प के बाद भारत और चीन के संबंधों में काफी तनाव आ गया था। इसके बाद कई वर्षों तक सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर तनाव बना रहा। हालांकि, 2024 में दोनों देशों ने तनाव कम करने की दिशा में कदम बढ़ाए। डोभाल और वांग यी की यह बैठक इसी बदलते दौर को दर्शाती है, जिसमें टकराव की जगह बातचीत और संवाद को महत्व दिया जा रहा है।
वांग यी पिछले वर्ष भी नई दिल्ली आए थे। अगस्त में विशेष प्रतिनिधियों की 24वीं बैठक के दौरान उन्होंने एनएसए अजीत डोभाल से बातचीत की थी।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, पिछले वर्ष हुई उस बैठक में दोनों पक्षों ने माना था कि 23वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता के बाद भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनी हुई है। दोनों देशों ने इस बात को दोहराया था कि सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखना भारत-चीन संबंधों के समग्र विकास के लिए जरूरी है।

Exit mobile version