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इंडिया एआई समिट की बड़ी कामयाबी: होगा 250 अरब डॉलर का निवेश, 70 से अधिक देश घोषणापत्र पर करेंगे हस्ताक्षर

नई दिल्ली: इंडिया एआई समिट में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 250 अरब डॉलर का निवेश हासिल हुआ है और ‘दिल्ली घोषणापत्र’ पर 70 देशों ने हस्ताक्षर किए हैं। नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई समिट’ भारत के तकनीकी और आर्थिक विकास के लिए एक ऐतिहासिक आयोजन साबित हो रहा है। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस आयोजन को एक बड़ी सफलता करार दिया है। इस वैश्विक महासम्मेलन में न केवल बुनियादी ढांचे के लिए 250 अरब डॉलर से अधिक का निवेश हासिल हुआ है, बल्कि 70 देशों ने भारत के कूटनीतिक नेतृत्व में ‘दिल्ली घोषणापत्र’ पर अपनी सहमति भी जता दी है। आसान शब्दों में कहें तो, यह समिट भारत को तकनीक की दुनिया में एक नए ग्लोबल लीडर के रूप में स्थापित कर रहा है।
इस शिखर सम्मेलन का सबसे अहम कूटनीतिक हिस्सा ‘दिल्ली घोषणापत्र’ रहा है। शुक्रवार को 20 फरवरी 2026 को आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि अब तक 70 राष्ट्र इस घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर चुके हैं और कई अन्य देशों के साथ बातचीत अभी भी जारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शनिवार को इस आयोजन के समापन तक सहमति जताने वाले देशों का अंतिम आंकड़ा 80 को पार कर जाएगा। इस दिल्ली घोषणापत्र की विस्तृत रूपरेखा और इसके अहम बिंदुओं को शनिवार को पूरी पारदर्शिता के साथ दुनिया के सामने साझा किया जाएगा।
भारत की बढ़ती तकनीकी ताकत को घरेलू स्तर पर भी जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। आईटी मंत्री ने बताया कि इस प्रदर्शनी में पांच से अधिक आगंतुकों ने हिस्सा लिया, जो देश में उन्नत तकनीक के प्रति भारी उत्साह को दर्शाता है।
इसके अलावा, इस आयोजन के दौरान बुनियादी ढांचे से जुड़े 250 अरब डॉलर से अधिक के निवेश कमिटमेंट प्राप्त हुए हैं। यह भारी-भरकम निवेश भारतीय अर्थव्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित होगा। इस बड़े तकनीकी आयोजन के बीच कुछ राजनीतिक हलचल भी देखने को मिली। कांग्रेस पार्टी द्वारा इस महत्वपूर्ण सम्मेलन को बाधित करने के प्रयासों पर टिप्पणी करते हुए आईटी मंत्री ने स्पष्ट किया कि विपक्षी दल के इस छोटे से प्रयास को भारत के युवाओं ने मजबूती से और पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
वैश्विक कूटनीति: ‘दिल्ली घोषणापत्र’ पर 70 से अधिक देशों का एक साथ आना यह प्रमाणित करता है कि अंतरराष्ट्रीय एआई नीतियों को तय करने में भारत एक अहम कूटनीतिक नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभा रहा है।
‘इंडिया एआई समिट’ ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब वैश्विक तकनीकी क्रांति का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। 5 लाख आगंतुकों की भागीदारी और 250 अरब डॉलर का भारी निवेश इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश की अर्थव्यवस्था सही दिशा में आगे बढ़ रही है। शनिवार को जब ‘दिल्ली घोषणापत्र’ के विस्तृत विवरण दुनिया के सामने आएंगे, तो भविष्य की तकनीकी नीतियों की तस्वीर और भी साफ हो जाएगी।

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