UK NEWS MIRROR DESK: (Google & Gmail) सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मशहूर शिक्षक खान सर दावा कर रहे हैं कि अगर अमेरिका और भारत के बीच संबंध खराब होते हैं, तो अमेरिका की टेक कंपनियां — खासतौर पर Google — भारत में अपनी सेवाएं बंद कर सकती हैं। उनका कहना है कि Gmail जैसी सेवाएं बंद होने से भारत की मोबाइल और डिजिटल सेवाएं पूरी तरह ठप हो सकती हैं।
लेकिन क्या वास्तव में ऐसा हो सकता है? आइए इस दावे की हकीकत को समझते हैं।
Gmail बंद होगा, तो क्या होगा?
अगर Google भारत में केवल Gmail को बंद कर देता है, तो इससे सिर्फ Google की ईमेल सेवा पर असर पड़ेगा। इसका मतलब यह नहीं है कि भारत के लोग पूरी तरह से डिजिटल दुनिया से कट जाएंगे।
Gmail के अलावा भी कई ईमेल सर्विस प्रोवाइडर मौजूद हैं जैसे Outlook, Yahoo Mail, ProtonMail आदि, जो Gmail के विकल्प हो सकते हैं।
अगर Google की सभी सेवाएं बंद हो जाएं तो…?
अब बात करते हैं उस स्थिति की, जब Google अपनी सभी सेवाएं भारत में बंद कर दे।
ऐसी स्थिति में शुरुआत में दिक्कतें जरूर होंगी, क्योंकि Play Store, Google Maps, YouTube, Google Pay जैसी कई सेवाएं हमारे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं। लेकिन यह कहना कि इससे UPI सेवाएं या BHIM जैसे ऐप्स काम करना बंद कर देंगे, पूरी तरह से सही नहीं है।
इन ऐप्स को थर्ड-पार्टी ऐप स्टोर्स से भी डाउनलोड किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर:
चीनी स्मार्टफोन्स में पहले से मौजूद थर्ड पार्टी स्टोर्स।
भारत का अपना Indus App Store (PhonePe द्वारा विकसित, जो फिलहाल बीटा वर्जन में उपलब्ध है)
दुनिया में चीन एक बड़ा उदाहरण है, जहां Google की कोई भी सेवा नहीं चलती, फिर भी वहां के लोग सभी डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं — क्योंकि उन्होंने अपने विकल्प तैयार कर लिए हैं। भारत भी ऐसी स्थिति में अपने विकल्प विकसित कर सकता है।
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क्या अमेरिका हमारे डेटा को एक्सेस कर रहा है?
वीडियो में खान सर यह भी दावा करते हैं कि अमेरिका भारत के नागरिकों का सारा डेटा एक्सेस कर रहा है।
इस दावे में भी पूरी सच्चाई नहीं है। भारत सरकार लंबे समय से डेटा लोकलाइजेशन पर जोर दे रही है। इसके अंतर्गत निम्न बिन्दु महत्वपूर्ण हो जाते हैं :
संवेदनशील और वित्तीय डेटा को भारत में ही स्टोर करना अनिवार्य है।
Google जैसी कंपनियां भी Google Pay का डेटा भारत में ही स्टोर करती हैं।
बाकी सामान्य डेटा को Google अपने ग्लोबल डेटा सेंटर्स में स्टोर करता है।
इसलिए यह कहना कि अमेरिका हमारे हर डेटा तक पहुंच सकता है, आधारहीन और भ्रामक है।
निष्कर्ष: डर नहीं, समझदारी जरूरी है
खान सर जैसे लोकप्रिय व्यक्तित्व जब ऐसे दावे करते हैं, तो उसका असर लोगों पर गहरा होता है। लेकिन जरूरी है कि हम ऐसे बयानों की तथ्यों के आधार पर जांच करें।
Gmail के बंद होने से मोबाइल सेवाएं बंद नहीं होतीं।
Google के बिना भी ऐप्स चल सकते हैं।
डेटा सुरक्षा के लिए भारत में मजबूत नीतियां बन रही हैं।
और सबसे अहम – भारत के पास विकल्प तैयार करने की क्षमता और संसाधन दोनों हैं।
डिजिटल भारत सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक हकीकत है — और इसमें आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार काम हो रहा है।
डिजिटल आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। हमें डरने की नहीं, सोच-समझकर फैसले लेने की जरूरत है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को देखकर घबराने के बजाय, प्रामाणिक और तकनीकी जानकारी के आधार पर ही कोई राय बनाएं। भारत एक टेक्नोलॉजिकल पावरहाउस बनता जा रहा है, और Google जैसे प्लेटफॉर्म की भूमिका महत्वपूर्ण जरूर है — लेकिन जरूरी नहीं।
