Site icon UK NEWS MIRROR

चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति के खिलाफ जरूरी है ओमान का सहयोग

नई दिल्ली : गुरुवार को भारत और ओमान के बीच सामुद्रिक क्षेत्र में सहयोग को प्रगाढ़ करने के लिए एक दृष्टि प्रपत्र पर सहमति बनी है। इसे हिंद महासागार व खाड़ी के क्षेत्र में भारत के ऊर्जा व रणनीतिक हितों की सुरक्षा के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उक्त सहमति पीएम नरेन्द्र मोदी और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल सईद के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान बनी, जिसकी घोषणा बाद में दोनों देशों की तरफ से की गई।
वैसे भी चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति के खिलाफ ओमान का सहयोग जरूरी है। मोदी तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में बुधवार शाम को ओमान पहुंचे थे। मोदी की यह ओमान यात्रा भारत और ओमान के बीच कूटनीतिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ के अवसर पर हो रही है। उन्होंने सुल्तान हैथम बिन तारिक के साथ दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने पर बात की।
बैठक में मोदी और सुलतान ने भारत और ओमान के बीच कूटनीतिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने को द्विपक्षीय साझेदारी में एक मील का पत्थर बताया। गुरुवार को ही भारत-ओमान के बीच कांप्रिहेसिव इकोनामिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (सीपा) पर हस्ताक्षर किए गए। मोदी ने इस कारोबारी समझौते को दोनों देशों के साझा भविष्य का ब्लूप्रिंट बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि हमने अन्य क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण प्रगति की है। आशा है कि भारत-ओमान मित्रता आने वाले समय में और मजबूत होती रहेगी।
मोदी ने भारत-ओमान बिजनेस समिट को भी संबोधित किया। वहां उन्होंने ओमानी कंपनियों को भारत की विकास गाथा में भागीदार बनने का न्योता दिया। पीएम मोदी और सुल्तान हैथम के बीच बैठक में मैरीटाइम सहयोग के लिए एक दृष्टिपत्र पर भी सहमति बनी है। यह प्रपत्र दोनों देशों की समुद्री पड़ोसी के रूप में सदियों पुरानी साझेदारी को मजबूत करते हुए क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनामी और महासागर संसाधनों के सतत उपयोग की प्रतिबद्धता को बताता है।
इस समझौते के जरिए ओमान के पास स्थिति होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भारत अपने हितों की सुरक्षा करना चाहता है। इस स्ट्रेट से विश्व का 20-30 प्रतिशत तेल व्यापार गुजरता है। भारत आने वाले कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा यहां से आता है। भारत को पहले से ओमान के दुक्म पोर्ट में सैन्य और लाजिस्टिक उपयोग की सुविधा मिली हुई है। नया समझौता इस सहयोग को और गहरा करेगा। यह भारतीय नौसेना को पश्चिमी हिंद महासागर में मजबूत आधार प्रदान करता है।
दुक्म पोर्ट भारत के लिए एक वैकल्पिक रणनीतिक ठिकाना है। यही नहीं, यह चीन की ‘स्टि्रंग आफ प‌र्ल्स’ रणनीति (जिसमें पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट आदि शामिल हैं) का मुकाबला करने में मदद करता है। ओमान गल्फ क्षेत्र का एकमात्र देश है जहां भारतीय सेना की तीनों शाखाएं नियमित संयुक्त अभ्यास करती हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तीन देशों की अहम यात्रा के बाद गुरुवार को ओमान से स्वदेश रवाना हुए। मोदी को ओमान के उप प्रधानमंत्री व रक्षा मामलों के मंत्री सैयद शिहाब बिन तारिक अल सईद ने ‘नमस्ते’ करते हुए उन्हें विदाई दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाला ने इस यात्रा को दिलों को छूने वाली और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने वाली बताया।

Exit mobile version