टैरिफ लगाने के लिए ट्रंप का नया दांव, धारा 301 का होगा इस्तेमाल

नई दिल्ली। अमेरिका ने भारत और चीन सहित 16 देशों की व्यापारिक नीतियों और टैरिफ के खिलाफ धारा 301 के तहत नए सिरे से व्यापार जांच शुरू की है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिका का सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा तमाम देशों पर लगाए गए टैरिफ को अवैध करार दे चुका है।
माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन टैरिफ लगाने पर आमादा है और जांच का कदम इसी सोच के साथ उठाया गया है। आइये जानते हैं कि क्या है धारा 301 के तहत व्यापार जांच और भारत इससे कैसे प्रभावित हो सकता है.. इन सेक्टर्स को कवर करती है जांच यूएस ट्रेड रेप्रेजेंटेटिव (यूएसटीआर) ने घोषणा की है कि उसने भारत, चीन, जपान और यूरोपीय संघ ईयू सहित अपने व्यापारिक सहयोगियों के खिलाफ जांच शुरू की है।
इसमें यह देखा जाएगा कि ये देश व्यापार के लिए अनुचित तौर तरीके तो नहीं अपना रहे हैं, जिससे अमेरिका के मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को नुकसान हो रहा है। जांच के निशाने पर 16 अर्थव्यवस्थाएं और उनकी व्यापारिक व औद्योगिक नीतियां हैं। स्टील, एल्युमिनियम, आटोमोबाइल, बैटरी, इलेक्ट्रानिक्स, केमिकल्स, मशीनरी, सेमीकंडक्टर और सेमी माड्यूल सहित दूसरे सेक्टर्स जांच के दायरे में हैं।
जिन 16 अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं, उनमें 15 देश और 17 देशों वाला ईयू ब्लाक शामिल है। 15 देशों में चीन, सिंगापुर,स्विटजरलैंड, नार्वे, इंडोनेशिया, मलेशिया, कंबोडिया, थाइलैंड, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, ताइवान, बांग्लादेश, मेक्सिको, जापान और भारत शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ रद किए जाने के बाद 20 फरवरी को राष्ट्रपति ट्रंप ने एक घोषणा पर हस्ताक्षर किए। इस घोषणा के तहत कोर्ट द्वारा अमान्य किए गए टैरिफ की जगह सभी देशों पर 10 प्रतिशत का अस्थायी आयात शुल्क लगाया गया। इसके बाद राष्ट्रपति ने कहा था कि यूएस के पास इस तरह के शुल्क लगाने के लिए अन्य विकल्प भी मौजूद हैं।
20 फरवरी को ही व्हाइट हाउस की एक फैक्ट शीट में बताया गया कि राष्ट्रपति ने यूएसटीआर को निर्देश दिया है कि वह धारा 301 की शक्ति का उपयोग करके कुछ ऐसे अनुचित और भेदभावपूर्ण कार्यों, नीतियों और प्रथाओं की जांच करे, जो अमेरिका के निर्यात को महंगा बना देते हैं या उसे प्रतिबंधित करते हैं।जांच की प्रक्रिया 1974 के यूएस ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत अमेरिका की सरकार इस बात की जांच कर सकती है कि क्या विदेशी व्यापार के तरीके अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं और क्या वे अमेरिकी व्यापार को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
ये जांचें यह तय करेंगी कि क्या वे कार्य, नीतियां और तरीके अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं और क्या वे अमेरिका के व्यापार पर बोझ डालते हैं या उसे सीमित करते हैं। ¨थक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (जीटीआरआइ) के अनुसार जांच इस बात की पड़ताल करेगी कि क्या औद्योगिक सब्सिडी, सरकार के समर्थन से मैन्यूफैक्चरिंग क्षमताओं का विस्तार, सरकारी स्वामित्व वाले उद्यमों की गतिविधियां, बाजार तक पहुंच में बाधाएं, मुद्रा संबंधी तरीके या घरेलू मांग में कमी लाने जैसी नीतियों ने ग्लोबल मैन्यूफैचरिंग क्षमता को मांग की तुलना में ज्यादा बढ़ा दिया है, जो अमेरिका के व्यापार पर बोझ डालती है।
अगर जांच में इन बातों की पुष्टि हो जाती है, तो अमेरिका जवाबी उपाय लागू कर सकता है, जिनमें अतिरिक्त टैरिफ, मात्रात्मक प्रतिबंध या अन्य व्यापार बाधाएं शामिल हैं। भारत पर इसका असर जीटीआरआइ का कहना है कि अमेरिकी जांच में भारत के कई सेक्टरों की पहचान कही गई है, जहां संरचनात्मक तौर पर जरूरत से ज्यादा क्षमता या निर्यात सरप्लस हो सकता है।
इनमें सोलर माड्यूल, प्रेट्रोकेमिकल्स, स्टील, टेक्सटाइल, स्वास्थ्य से जुड़ी वस्तुएं, निर्माण में उपयोग होनी वाली सामग्री और आटो प्रोडक्ट शामिल हैं। अमेरिकी नोटिस के अनुसार भारत की सोलर माड्यूल मैन्यूफैक्च¨रग क्षमता घरेलू मांग की तुलना में तीन गुना अधिक है। यह इस बात का संकेत है कि यह क्षमता निर्यात को ध्यान में रख कर बढ़ाई गई है।

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