नई दिल्ली। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में देश ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन – डी.आर.डी.ओ. ने स्वदेशी नेत्रा एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम की अंतिम परिचालन मंजूरी प्राप्त कर ली है।
बेंगलुरु में आज आयोजित एक समारोह में भारतीय वायुसेना को मंजूरी पत्र सौंपा गया। इस प्रणाली से देश की हवाई निगरानी और नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता को मजबूती मिलेगी।
समारोह के मुख्य अतिथि वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने स्वदेशी नेत्रा प्रणाली की सराहना की। उन्होंने कहा कि बालाकोट कार्रवाई और ऑपरेशन सिंदूर जैसे महत्वपूर्ण अभियानों में इस प्रणाली ने अपनी परिचालन क्षमता साबित की है।
उन्होंने कहा कि नेत्रा जैसी स्वदेशी तकनीकें सेना को बदलती युद्ध परिस्थितियों के अनुसार तेजी से बदलाव करने और अपनी क्षमताएं बढ़ाने में मदद करती हैं।
डी.आर.डी.ओ. के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि नेत्रा प्रणाली की सफलता डी.आर.डी.ओ. की प्रयोगशालाओं, भारतीय वायुसेना, प्रमाणन एजेंसियों और देश की निजी रक्षा कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल का परिणाम है।
इस अवसर पर पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर. के. एस. भदौरिया और पूर्व डी.आर.डी.ओ. अध्यक्ष डॉ. एस. क्रिस्टोफर सहित कई वरिष्ठ सैन्य और वैज्ञानिक अधिकारी मौजूद रहे।
