देहरादून/उत्तरकाशी: धराली आपदा में लापता लोगों की तलाश के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। खोजबीन के लिए हर तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। एसडीआरएफ व एनडीआरएफ की ओर से थर्मल इमेजिंग, विक्टिम लोकेटिंग कैमरे और खोजी कुत्तों की मदद से मलबे व भारी भरकम पत्थरों के नीचे तलाश की जा रही है। शुक्रवार को शाम तक 257 फंसे लोगों को रेस्क्यू किया। जबकि अब तक (चार दिन) 729 से अधिक फंसे लोगों को हर्षिल, गंगोत्री, मातली से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की निगरानी आपदा प्रभावित धराली क्षेत्र में राहत और बचाव अभियान जारी है। मुख्यमंत्री तीसरे दिन भी ग्राउंड जीरो पर हैं। प्रभावितों से मिलने के साथ ही बचाव व राहत कार्यों की पल-पल की जानकारी लेने के साथ अधिकारियों को निर्देश दे रहे हैं।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने मातली हेलिपैड पहुंचकर हेलिकॉप्टर से राहत सामग्री की खेप रवाना की। चिनूक व एमआई-17 हेलिकॉप्टर से बचाव व राहत कार्य के लिए मशीनरी पहुंचाने के साथ ही फंसे लोगों को निकाला जा रहा है। सेना व यूकाडा के हेलिकॉप्टर से शाम तक हर्षिल, झाला, गंगोत्री से 257 यात्रियों को एयरलिफ्ट कर मातली पहुंचाया जा चुका था।
मुख्यमंत्री ने कहा, राज्य सरकार तेजी से आपदा ग्रस्त क्षेत्र में बिजली, पानी, संचार के साथ सड़क कनेक्टिविटी बहाल करने का प्रयास कर रही है। साथ ही प्रभावितों के पुनर्वास के भी प्रयास शुरू किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आपदा में क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों व फसलों के नुकसान के आकलन के लिए डीएम उत्तरकाशी को निर्देश दे दिए हैं।
चौथे दिन धराली व आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल हो गई है। इसके साथ ही संचार नेटवर्क बहाल होने से प्रभावित क्षेत्र के लोगों का राहत मिली है। गंगोत्री नेशनल हाईवे पर क्षतिग्रस्त सड़कों को ठीक करने के लिए युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। भटवाड़ी से आगे लिमचिगाढ़ में बैली ब्रिज बनाने का सेना, बीआरओ ने काम शुरू कर दिया है।
धराली में दो आईएएस और दो आईपीएस अधिकारियों ने राहत एवं बचाव अभियान की कमान संभाली हुई है। प्रभावित परिवारों को धराली व हर्षिल में सामुदायिक रसोई में भोजन की व्यवस्था की गई है।
