Site icon UK NEWS MIRROR

नगालैंड के चुमौकेदिमा में हिंसक झड़प, 26 लोग घायल; भूमि विवाद के बाद फूंके गए कई घर और वाहन

दिमापुर: नगालैंड के चुमौकेदिमा जिले में जमीन से जुड़े विवाद को लेकर हुई झड़प में 26 लोग घायल हो गए हैं। जबकि इस दौरान कई घरों और वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। फिलहाल पुलिस ने हालत को संभाला लिया है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। नगालैंड पुलिस ने बताया कि राज्य के चुमौकेदिमा जिले में शुक्रवार को जमीन विवाद को लेकर हुए संघर्ष में कम से कम 26 लोग घायल हो गए। पुलिस ने बताया कि यह घटना मेडजेफेमा उपमंडल के मोआवा गांव में सुबह घटी। पुलिस के अनुसार अब स्थिति नियंत्रण में है। इलाके में सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं और यातायात सामान्य कर दिया गया है। पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून अपने हाथ में न लेने की अपील की है।
चाखरोमा पब्लिक ऑर्गेनाइजेशन (सीपीओ) का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से जमीन को लेकर तनाव चल रहा था। आरोप है कि जमीन खरीदने वाले लोगों को वहां निर्माण और खेती करने से रोका जा रहा था, जबकि कुछ जगहों पर कथित तौर पर अवैध निर्माण किए जा रहे थे। सीपीओ ने 2 दिसंबर को गांव के मुखिया को नोटिस देकर 25 दिसंबर तक कथित अवैध निर्माण हटाने की समयसीमा दी थी। संगठन का दावा है कि इस नोटिस को नजरअंदाज किया गया और निर्माण कार्य जारी रहा।
सीपीओ के अध्यक्ष झातो किम्हो के मुताबिक, संगठन के नेता जब गांव में बातचीत के लिए पहुंचे तो 70-80 लोगों की भीड़ ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद गांव वालों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी, जिसमें मेदजिफेमा के एक्स्ट्रा असिस्टेंट कमिश्नर, एक पुलिस कांस्टेबल और करीब 24 युवक घायल हो गए। इसके बाद सैकड़ों युवक गांव में घुस गए, भीड़ को तितर-बितर किया और कुछ कथित अवैध घरों में आग लगा दी। कई वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया।
मोआवा गांव के गांव बुराह (मुखिया) सेइबोई चांगसान का आरोप है कि बाहरी लोगों की भीड़ ने गांव में आकर सार्वजनिक और निजी संपत्ति को आग लगा दी। इनमें सामुदायिक भवन, गेस्ट हाउस, युवा कार्यालय और दुकानों की कतार शामिल है। उनका कहना है कि पांच चारपहिया और पांच दोपहिया वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस को पहले ही सूचना दी गई थी, लेकिन भीड़ ज्यादा होने के कारण हालात बिगड़ गए।
सीपीओ ने साफ किया है कि यह पूरा मामला दो समुदायों के बीच का संघर्ष नहीं है, बल्कि मोआवा गांव के कुछ व्यक्तियों से जुड़ा विवाद है। फिलहाल स्थानीय प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है और शांति बहाल करने की कोशिश की जा रही है।

Exit mobile version