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भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध नौवहन और व्यापार जारी रखने का किया आह्वान

नई दिल्ली।  भारत पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखे हुए है। भारत ने एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध नौवहन और व्यापार जारी रखने का आह्वान किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्‍ली में कहा कि यह विश्वभर के लोगों की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय ने ईरान के उप मिशन प्रमुख को तलब कर भारत की गहरी चिंता से अवगत कराया और जो कुछ हुआ है उसकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि एक भारतीय नागरिक की जान चली गई है और कई भारतीय गंभीर रूप से घायल हैं। प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि इन हमलों को जल्द से जल्द रोका जाना चाहिए। साथ ही, तनाव कम किया जाना चाहिए और दोनों पक्षों को बातचीत, संवाद और कूटनीति का मार्ग अपनाना चाहिए ताकि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

पाकिस्‍तान के कब्‍जे वाले जम्मू-कश्मीर में विरोध प्रदर्शनों पर श्री जायसवाल ने कहा कि यह प्रदर्शन पाकिस्तान द्वारा दशकों से किए जा रहे शोषण, मौलिक अधिकारों के हनन तथा अवैध और जबरन कब्जे वाले क्षेत्रों में प्रशासनिक दमन का परिणाम हैं। उन्होंने बताया कि लोगों की शिकायतों को दूर करने के बजाय, पाकिस्तानी सरकार ने पुलिस की बर्बरता और घातक बल प्रयोग किया है। इससे कई दुखद मौतें हुई हैं। उन्होंने कहा कि भारत को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन दुर्व्यवहारों और कुकर्मों के लिए पाकिस्तान को पूरी तरह से जवाबदेह ठहराएगा।

लॉरेंस बिश्नोई गिरोह पर अभियोग के संबंध में, प्रवक्ता ने कहा कि भारत लगातार यह कहता रहा है कि अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, अवैध हथियारों की तस्करी और संबंधित आपराधिक नेटवर्क समाज के लिए बड़ा खतरा हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटने में भारत और अमरीका के बीच मजबूत सहयोग है। श्री जायसवाल ने कहा कि दोनों देशों की एजेंसियां कई वर्षों से मिलकर काम कर रही है और यह सहयोग लगातार बढ़ता जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन-यूएनसीएलओ पर श्री जायसवाल ने कहा कि दक्षिण चीन सागर मुद्दे पर भारत का रुख सर्वविदित है। उन्होंने नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता, समुद्र के अन्य वैध उपयोगों और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप निर्बाध व्यापार को बनाए रखने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समुद्री विवादों का समाधान शांतिपूर्ण ढंग से और यूएनसीएलओ के अनुसार किया जाना चाहिए। प्रवक्ता ने दोहराया कि दस वर्ष पूर्व मध्यस्थ न्यायाधिकरण द्वारा दिया गया निर्णय महत्वपूर्ण है और पक्षों के बीच विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का आधार है।

कनाडा में निज्जर मामले पर श्री जायसवाल ने कहा कि मंत्रालय ने रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस के उप आयुक्त द्वारा की गई टिप्पणियों पर ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि ये टिप्पणियां हाल ही में सार्वजनिक किए गए अमरीकी अभियोग के अनुरूप हैं। इसमें लॉरेंस बिश्नोई संगठित अपराध समूह के सदस्यों को दोषी ठहराया गया है। भारत आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटने के लिए अपने साझेदारों के साथ घनिष्ठ कानून प्रवर्तन और सुरक्षा सहयोग के माध्यम से काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

पासपोर्ट पर श्री जायसवाल ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट एक ऐसा दस्तावेज है जो पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा लोगों के भारत से प्रस्थान को विनियमित करने के लिए जारी किया जाता है। यह एक स्थापित प्रक्रिया द्वारा निर्धारित उचित सत्यापन के बाद जारी किया जाता है। प्रवक्ता ने कहा कि भारतीय नागरिकों या किसी अन्य व्यक्ति को पासपोर्ट जारी करना पासपोर्ट अधिनियम और पासपोर्ट नियम, 1980 द्वारा नियंत्रित होता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 8 प्रतिशत से भी कम भारतीय नागरिकों के पास पासपोर्ट है।

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