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लोक संवर्धन पर्व के आयोजन में केंद्र के साथ साझेदारी करने वाला उत्तराखंड बना देश का पहला राज्य

देहरादून: भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय तथा उत्तराखंड सरकार के उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम के संयुक्त तत्वावधान में आज परेड ग्राउंड, देहरादून में छठे लोक संवर्धन पर्व का शुभारंभ किया गया। पांच दिवसीय इस महोत्सव का उद्घाटन केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री  खजान दास, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय एवं उत्तराखंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, देशभर से आए शिल्पकारों, उद्यमियों तथा गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में किया। यह महोत्सव 15 जुलाई 2026 तक आम जनता के लिए खुला रहेगा। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि लोक संवर्धन पर्व देशभर के कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों और उद्यमियों के लिए अपनी पारंपरिक कला एवं उत्पादों के प्रदर्शन का एक राष्ट्रीय मंच बनकर उभरा है। उन्होंने देहरादून संस्करण को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (पीएम विकास) योजना के अंतर्गत इस प्रमुख आयोजन के लिए पहली बार किसी राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के साथ साझेदारी की है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा दिए गए सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि राज्य ने केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति अनुकरणीय प्रतिबद्धता दिखाई है।

रिजिजू ने कहा कि भारत सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना के साथ बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक नागरिक के विकास के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि लोक संवर्धन पर्व सभी भारतीयों का उत्सव है तथा नागरिकों से प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान को सफल बनाने के लिए स्वदेशी उत्पाद खरीदने और स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहित करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि मानसून समाप्त होने के बाद वह मुख्यमंत्री के साथ परामर्श कर उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों का दौरा करेंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड के लिए पहली बार लोक संवर्धन पर्व की मेजबानी करना तथा इस आयोजन के लिए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के साथ साझेदारी करने वाला देश का पहला राज्य बनना गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव नई पीढ़ी को भारत की समृद्ध शिल्प परंपराओं से परिचित कराएगा तथा उत्तराखंड के कारीगरों को अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराएगा। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण, उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ और ‘वन डिस्ट्रिक्ट टू प्रोडक्ट्स’ जैसी योजनाओं के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को सशक्त बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीवत्स कृष्णा ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में शुरू होने के बाद से लोक संवर्धन पर्व ने दो वर्ष से भी कम समय में देश के विभिन्न हिस्सों की यात्रा करते हुए कारीगरों और उद्यमियों को एक सशक्त मंच प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में आयोजित यह पहला लोक संवर्धन पर्व है, जिसमें लगभग 150 कारीगर, जिनमें लगभग 90 महिला कारीगर शामिल हैं, अपनी कला और ‘नारी शक्ति’ की भावना का प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोक संवर्धन पर्व प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विजन को साकार करते हुए देशभर के कारीगरों के समावेशी विकास और सशक्तिकरण का माध्यम बन रहा है। उत्तराखंड सरकार के विशेष सचिव (अल्पसंख्यक कल्याण) पराग मधुकर तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव  एस. पी. रॉय ने भी समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उत्तराखंड सरकार द्वारा लोक संवर्धन पर्व के छठे संस्करण के उपलक्ष्य में एक स्मारक डाक लिफाफा भी जारी किया गया।

उद्घाटन सत्र के उपरांत केंद्रीय मंत्री  किरेन रिजिजू, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मंत्री  खजान दास तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों, उद्यमियों तथा पाक-कला विशेषज्ञों से संवाद किया। उन्होंने प्रतिभागियों की उत्कृष्ट शिल्पकला की सराहना करते हुए उन्हें लोक संवर्धन पर्व जैसे मंचों का उपयोग कर बाजार से जुड़ाव बढ़ाने, व्यापारिक अवसरों का विस्तार करने तथा सतत आजीविका को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण भी किया।

महोत्सव में लगभग 150 प्रदर्शनी स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें से लगभग 40 प्रतिशत स्टॉल उत्तराखंड की कला एवं शिल्प को समर्पित हैं। शेष स्टॉलों पर देश के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद तथा विरासत शिल्प प्रदर्शित किए गए हैं। आगंतुक 20 फूड स्टॉलों पर पारंपरिक पहाड़ी एवं कुमाऊंनी व्यंजनों सहित विभिन्न राज्यों के प्रामाणिक क्षेत्रीय स्वाद का आनंद भी ले सकते हैं। महोत्सव के दौरान लाइव शिल्प प्रदर्शन, खरीदार-विक्रेता बैठकें, उद्यमिता एवं डिजिटल मार्केटिंग सत्रों का भी आयोजन किया जा रहा है, जिससे कारीगरों एवं उद्यमियों की बाजार तक पहुंच को और सुदृढ़ बनाया जा सके। उद्घाटन संध्या का समापन सुप्रसिद्ध ग़ज़ल गायक तलत अज़ीज़ की प्रस्तुति के साथ हुआ। महोत्सव के आगामी दिनों में ज्योति नूरां, किशन महिपाल, विवेक नौटियाल, माया उपाध्याय, पांडवास तथा परमीश वर्मा अपनी प्रस्तुतियों से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का उत्सव मनाएंगे।

वर्ष 2024 में प्रारंभ होने के बाद से अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (एनएमडीएफसी) के सहयोग से लोक संवर्धन पर्व के पांच संस्करण आयोजित किए जा चुके हैं, जिनसे 550 से अधिक कारीगरों, बुनकरों और पाक-कला विशेषज्ञों को बाजार तक पहुंच, व्यवसाय विकास तथा सतत आजीविका के अवसर प्राप्त हुए हैं। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने नागरिकों, पर्यटकों, विद्यार्थियों, खरीदारों, निर्यातकों तथा हस्तशिल्प प्रेमियों से 11 से 15 जुलाई 2026 तक प्रतिदिन प्रातः 11:30 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित लोक संवर्धन पर्व का भ्रमण करने का आग्रह किया है। महोत्सव में प्रवेश सभी आगंतुकों के लिए निःशुल्क है।

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