नई दिल्ली। एक तरफ पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रुकवाने के लिए अपने यहां दोनों देशों के बीच शांति वार्ता करा रहा है तो दूसरी और उसने अपने करीब 13,000 सैनिक और 10 से 18 लड़ाकू विमान सऊदी अरब भेजे हैं। यानी पश्चिम एशिया संकट को लेकर पड़ोसी देश का विरोधाभास सामने आया है।
असल में पिछले वर्ष सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रणनीतिक रक्षा समझौता हुआ था, जिसके तहत दोनों देश में किसी भी एक पर हुए हमले को खुद पर हुआ हमला मानेंगे। बता दें कि अमेरिका और इजरायली हमलों की प्रतिक्रिया में ईरान सऊदी अरब में अमेरिकी एयरबेसों को भी निशाना बना रहा है।
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तान का यह सैन्य दल अब्दुल अजीज एयरबेस पर पूर्वी क्षेत्र में तैनात किया गया है। इस तैनाती का मुख्य उद्देश्य संयुक्त सैन्य समन्वय को बढ़ाना, दोनों देशों की सशस्त्र सेनाओं के बीच ऑपरेशनल रीडनेस में सुधार करना और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना है।
एक पाकिस्तानी सरकारी अधिकारी ने भी पुष्टि की कि दोनों देशों के बीच हुए रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत पाक सैनिकों और लड़ाकू विमानों को सऊदी अरब भेजा गया है।अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ मोहम्मद मेहदी ने बताया कि पाकिस्तान ने पिछले महीने सऊदी अरब में अपने लड़ाकू विमान और सैनिक भेजे थे, लेकिन यह जानकारी अब सऊदी अधिकारियों द्वारा साझा की गई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सैनिक और लड़ाकू जेट केवल सऊदी अरब की रक्षा के लिए वहां तैनात हैं।
