नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से अपने कई अभूतपूर्व आविष्कारों का प्रदर्शन किया। प्रदर्शित की गई प्रमुख प्रणालियों में 1500 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल शामिल थी।
इस हाइपरसोनिक मिसाइल को भारतीय नौसेना की तटीय आवश्यकताओं को पूरा करने और समुद्री हमले की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए डिजायन किया गया है। यह एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है जो स्थिर और गतिशील दोनों तरह के लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। इसे कई प्रकार के पेलोड ले जाने के लिए डिजायन किया गया है।
इसे अपनी तरह की पहली ऐसी प्रणाली बताया गया है जिसमें पूरी तरह से स्वदेशी एवियोनिक्स और उच्च-सटीकता वाले सेंसर लगे हैं। यह एक अर्ध-बैलिस्टिक प्रक्षेप मार्ग पर चलती है, जो शुरुआत में मैक 10 की गति हासिल करने के बाद अपनी उड़ान के दौरान मैक 5.0 की औसत गति कायम रखती है। स्वदेशी रूप से विकसित सेंसर मिसाइल को अंतिम चरण के दौरान गतिशील लक्ष्यों को सटीक रूप से भेदने में सक्षम बनाते हैं।
कम ऊंचाई पर उड़ान में सक्षम होने, उच्च गति और मेनुवर क्षमता के कारण दुश्मन के जमीन और जहाज पर स्थित रडार सिस्टम इसका पता लगाने में असमर्थ रहते हैं। इस वजह से यह बेहद घातक हथियार प्रणाली बन जाती है। इस मिसाइल में दो-चरण की ठोस प्रणोदन राकेट मोटर प्रणाली लगी है। पहले चरण के समाप्त होने और अलग होने के बाद, दूसरा चरण मिसाइल को आगे बढ़ाता है।
