नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने ब्रिटिश समकक्ष जोनाथन पॉवेल के साथ बैठक की, जिसमें सुरक्षा चिंताओं पर मंथन हुआ। डोभाल ने ब्रिटेन में खालिस्तान के समर्थन में चल रही गतिविधियों पर भी भारत की चिंता को सामने रखा और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने गुरुवार को अपने ब्रिटिश समकक्ष जोनाथन पॉवेल के साथ विस्तृत बातचीत की। इस बातचीत में भारत की आतंकवाद, चरमपंथ और ब्रिटेन से खालिस्तान के समर्थन में चल रही गतिविधियों को लेकर चिंताओं पर फोकस किया गया।
अधिकारियों के मुताबिक, दोनों ने अस्थिर वैश्विक माहौल के बीच भारत-ब्रिटेन की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई। डोभाल और पॉवेल ने पश्चिम एशिया की तनावपूर्ण स्थिति और समुद्री सुरक्षा और व्यापार पर उसके असर को लेकर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
इस दौरान डोभाल ने कहा कि किसी भी संघर्ष को सुलझाने का एकमात्र रास्ता बातचीत और कूटनीति है। यह वार्ता भारत-ब्रिटेन के वार्षिक रणनीतिक संवाद के तहत हुई।
दृष्टिकोण 2035 के लक्ष्यों पर जताई सहमति
दोनों राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने इस बात को दोहराया कि भारत-ब्रिटेन दृष्टिकोण-2035 दस्तावेज के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की जरूरत है, जिसमें तकनीक, रक्षा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में लंबे समय के सहयोग को मजबूत करना शामिल है।
दोनों पक्षों ने आतंकवाद, चरमपंथ और खालिस्तान समर्थक तत्वों से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। डोभाल ने इन मुद्दों पर लगातार सहयोग के लिए ब्रिटेन सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच और अधिक सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता है।
डोभाल और पॉवेल ने भारत-ब्रिटेन तकनीकी सुरक्षा पहल के तहत हुई प्रगति की भी समीक्षा की और दूरसंचार, महत्वपूर्ण खनिज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे क्षेत्रों में कुछ अहम उपलब्धियों पर फोकस किया।
अधिकारियों के मुताबिक, डोभाल ने संतोष जताया कि इस पहल के तहत ओडिशा के भुवनेश्वर में सिलिकॉन कार्बाइड आधारित सेमीकंडक्टर सुविधा स्थापित की गई है, जिसे ब्रिटेन की कंपनी और भारत की कंपनी के सहयोग से बनाया गया है। दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी और उन्नत सामग्री के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई।
