अनुकंपा नियुक्ति में विवाहित बेटियों को भी समान अधिकार: सर्वोच्च न्यायालय

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्‍यायालय ने कहा है कि विवाहित बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता है। न्‍यायालय ने कहा कि परिवार की परिभाषा से विवाहित बेटियों को बाहर रखना स्पष्ट रूप से मनमाना, अनुचित और संवैधानिक रूप से गलत है।

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और आलोक आराधे की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। उच्च न्यायालय ने कहा था कि अनुकंपा नियुक्ति के उद्देश्य से परिवार की परिभाषा में विवाहित बेटी को शामिल नहीं किया जाता है।

एक अनुकंपा नियुक्ति में, यदि कोई कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्‍यु हो जाती है या चिकित्सा कारणों से समय से पहले सेवानिवृत्त हो जाता है, तो सरकार परिवार के किसी सदस्य को नौकरी देती है।

सर्वोच्च न्यायालय एक महिला द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रहा था, जो एक मृतक व्यापारी की विवाहित बेटी है। महिला ने उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें अनुकंपा के आधार पर उचित मूल्य की दुकान के डीलर के रूप में उसकी नियुक्ति के दावे को खारिज कर दिया गया था। महिला ने 2019 के उस सरकारी आदेश को चुनौती दी थी जिसमें विवाहित बेटियों को परिवार की परिभाषा से बाहर रखा गया था।

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