गृह मंत्री अमित शाह ने देश में नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए अर्धसैनिक बलों, पुलिस और जनता के प्रयासों की सराहना की

नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि वामपंथी उग्रवाद ने प्रभावित क्षेत्रों में विकास को बाधित किया था, लेकिन अब नरेंद्र मोदी सरकार के नेतृत्व में इन क्षेत्रों में विकास पहुंच रहा है। श्री शाह ने कहा कि हथियार उठाने वाले किसी भी व्यक्ति को जवाबदेह ठहराया जाएगा। गृहमंत्री लोकसभा में देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त करने के प्रयासों पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे।

उन्‍होंने कहा कि रेड कॉरिडोर 12 राज्यों में फैला हुआ था और वामपंथी हिंसा में 20 हजार लोगों ने अपनी जान गंवाई और 12 करोड़ लोग वर्षों तक गरीबी में रहे और प्रभावित क्षेत्रों तक विकास नहीं पहुंचा।

श्री शाह ने 2014 के बाद देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त कराने के लिए मोदी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उल्‍लेख किया। उन्‍होंने कहा कि 596 पुलिस स्टेशनों के निर्माण से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि 2014 में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 126 थी, जो अब घटकर दो रह गई है। उन्होंने बताया कि पिछले छह वर्षों में 406 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की स्थापना की गई है और सुरक्षा बलों को 400 बुलेटप्रूफ वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि 2024 से मार्च 2026 तक मुठभेड़ों में 706 नक्सली मारे गए। उन्होंने बताया कि 2218 नक्सलियों को हिरासत में लिया गया और 4839 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है। उन्होंने देश में वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के अभियान में शामिल अर्धसैनिक बलों, राज्य पुलिस बलों और लोगों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने नक्सलवाद के खतरे से निपटने में जान गंवाने वाले युवाओं और अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

श्री शाह ने कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीकार किया था कि नक्सलवाद देश के सामने एक बड़ी चुनौती है। लेकिन कांग्रेस ने इस बारे में कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि देश में नक्सली हिंसा 1970 के दशक में नक्सलबाड़ी से शुरू हुई। उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में पीपुल्स वॉर ग्रुप के माध्यम से यह महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्यों में फैल गई। उन्होंने कहा कि 2004 में सीपीआई (माओवादी) का गठन हुआ और उसके बाद नक्सली हिंसा ने गंभीर रूप ले लिया। उन्होंने कहा कि इस पूरे दौर में कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी।

इससे पहले, लोकसभा में शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने नरेंद्र मोदी सरकार, अर्धसैनिक बलों और पुलिस बलों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने वामपंथी उग्रवाद से लड़ते हुए जान गंवाने वाले सभी सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि भी दी। श्री शिंदे ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि सत्ता में रहते हुए पार्टी जनजातीय और पिछड़े समुदायों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने में विफल रही, जिसके कारण उन्हें हथियार उठाने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि एक समय था जब जनजातीय लोगों का शोषण हुआ और उन्हें नक्सलवाद की आग में धकेल दिया गया, लेकिन आज स्थिति बदल गई है। उन्होंने कहा कि अब एक जनजातीय महिला देश की राष्ट्रपति हैं।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने जनजातीय लोगों गरीबों और हाशिए पर रहने वाले लोगों का विश्वास फिर से हासिल कर लिया है। श्री शिंदे ने कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों से रेड कॉरिडोर अब विकास कॉरिडोर में परिवर्तित हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश के 200 जिलों में फैला वामपंथी उग्रवाद अब सिर्फ तीन जिलों तक सिमट गया है।

कांग्रेस के सप्तगिरि शंकर उलका ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान नक्सलवाद को खत्म करने के लिए कई प्रयास किए गए थे। उन्होंने कहा कि पुलिस बलों का आधुनिकीकरण किया गया और 2008 में कोबरा यूनिट की स्थापना की गई। उन्होंने यह भी कहा कि यूपीए सरकार के दौरान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों और स्कूलों का निर्माण किया गया था।

भाजपा के संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार ने नक्सलियों को संरक्षण दिया। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2010 में यूपीए शासनकाल के दौरान एक ही दिन में 75 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे।

टीडीपी के बायरेड्डी शबरी ने आरोप लगाया कि यूपीए शासनकाल के दौरान 2004 से 2014 के बीच नक्सली हमलों की संख्या सबसे अधिक रही। उन्होंने कहा कि एक गांव से शुरू हुआ नक्सलवाद कांग्रेस सरकार की कमजोर नीतियों के कारण बाद में दस राज्यों के 182 जिलों में फैल गया।लोकसभा की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्‍थगित कर दी गई है।

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