नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण और देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे प्रत्येक नागरिक की सराहना की। राष्ट्रपति ने तीनों सेना के जवानों और पुलिस कर्मियों की कर्तव्यनिष्ठा और विश्व पटल पर भारत का मान-सम्मान बढ़ाने वाले प्रवासी भारतीयों की विशेष रूप से प्रशंसा की।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि विश्व के अनेक क्षेत्रों मे युद्ध और अस्थिरता का प्रभाव सभी देशों पर पड़ रहा है। ऐसी परिस्थिति में भी भारत की अर्थव्यवस्था तेज गति से आगे बढ़ रही है। आर्थिक अनुमान के अनुसार भारत की विकास दर विश्व की औसत विकास दर की तुलना में दोगुने से भी अधिक रहेगी। राष्ट्रपति ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान से हमारी आर्थिक प्रगति और राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार मजबूत हुआ है।
सत्य और न्याय के पक्ष में मानवता विरोधी शक्तियों पर विजय की भारतीय परंपरा को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि 26 जुलाई को हमने करगिल विजय दिवस मनाया और 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के आरंभ का एक वर्ष पूरा होने पर अपनी सेना के अतुल्य पराक्रम का स्मरण किया। आतंकवाद के विरुद्ध इस ऐतिहासिक ऑपरेशन ने आतंकवादियों और उनके समर्थकों को यह कड़ा संदेश दिया कि चाहे वे कहीं भी जाकर छिपें, अपने किये की सजा उन्हें जरूर मिलेगी।
दशकों तक गंभीर चुनौती बने रहे नक्सवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को नक्सल मुक्त बनाना एक बड़ी उपलब्धि है। अब नक्सल ग्रस्त क्षेत्रों में विकास की धारा बह रही है। बस्तर ओलिंपिक्स में खिलाड़ियों की, बस्तर पंडुम में कलाकारों की और इन आयोजनों में दर्शकों की भारी संख्या में भागीदारी नक्सल मुक्त क्षेत्र का प्रमाण है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की विदेश नीति देश हित पर आधारित है तथा शांति, सहयोग, संवाद और वसुधैव कुटुंबकम् के आदर्श हमारी विदेश नीति के स्तंभ हैं। आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए भारत ने अनेक देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया है। अविकसित देशों में भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विश्व पटल पर देश का सम्मान बढ़ा है। श्रीमती मुर्मु ने कहा कि भारत नियम आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में विश्वास रखता है और संयुक्त राष्ट्र सहित बहुपक्षीय संगठनों में वैश्विक समुदाय का समुचित प्रतिनिधित्व चाहता है। उन्होंने कहा कि इस प्रयास को अनेक देशों का समर्थन भी मिल रहा है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने शिक्षा क्षेत्र में लड़कियों के प्रभावी प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कृषि उत्पादकता बढ़ाने में ड्रोन दीदी के योगदान से लेकर सेना सहित विभिन्न क्षेत्रों मे महिलाओं की भागीदारी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में देश के कुल 13 स्वर्ण पदकों में 8 स्वर्ण पदक बेटियों ने जीते हैं। महिलाओं की आर्थिक निर्भरता बढ़ने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों में 10 करोड़ से अधिक महिला सदस्य हैं और हमारा देश 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि मुद्रा योजना के तहत सहायता प्राप्त उद्यमियों में लगभग दो तिहाई लाभार्थी महिलाएं हैं।
राष्ट्रपति ने महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि महात्मा फुले और सावित्री बाई फुले ने महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय, शिक्षा और समानता के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान दिया है। उनके आदर्शों के आधार पर ही वंचित वर्गों को आगे बढ़ाने के लक्ष्य को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी गई।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को विश्व की सबसे बड़ी और सबसे अच्छी भुगतान व्यवस्था बताया। उन्होंने कहा कि रेहड़ी पटरी और गांव की छोटी-छोटी दुकानों पर भी डिजिटल भुगतान हो रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया के आधे से अधिक डिजिटल ट्रांजैक्शन भारत में हो रहे हैं। देशवासियों और सरकार ने मिलकर डिजिटल क्रांति का उदहारण विश्व के सामने रखा है।
राष्ट्रपति ने स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर अपने संबोधन में कहा कि भारत का संविधान जनभागीदारी से निर्मित है। जनभागीदारी की भावना लोकतंत्र की जननी भारत भूमि में हमेशा से रही है और देशवासी नई उर्जा के साथ राष्ट्रीय अभियानों को आगे बढ़ा रहे हैं, जो हमारे लोकतंत्र की प्रेरक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की गरिमा, प्रतिष्ठा और अवसर की समानता हमारे संविधान के प्रमुख आदर्श हैं। उन्होंने पूरे विश्वास से कहा कि भारत में हर व्यक्ति बड़े सपने देख सकता है और पूरा भी कर सकता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि हमारे अनेक युवा स्वरोजगार अपनाते हुए रोजगार देने की क्षमता भी मजबूत कर रहे हैं। युवा भागीदारी से देश में मजबूत स्टार्टअप ईको-सिस्टम विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी भारत के भविष्य निर्माता है तथा उनके वर्तमान और भविष्य के लिए सब का प्रयास जरूरी है। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार और अनुचित साधनों पर अंकुश लगाने के लिए व्यापक कदम उठा रही है।
राष्ट्रपति ने कहा कि युवा आबादी देश की सबसे मूल्यवान संपदा है। भारत की कुल आबादी में 65 प्रतिशत लोग 35 वर्ष से कम के हैं। उन्होंने कहा कि देश के युवा प्रतिभा संपन्न, निष्ठावान और कौशल संपन्न है और ऐसे युवाओं ने विश्व समुदाय में भारत की साख बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी भारत के स्वर्णिम भविष्य के प्रति आस्था प्रबल करती है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि एक ओर हमारे देश में जहां विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी है वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ नागरिकों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों का जीवन बेहतर बनाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। 70 साल और इससे अधिक के लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक की निशुल्क स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध है।
राष्ट्रपति ने कहा कि स्वाधीनता के शताब्दी वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए पूरा देश एकजुट होकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अंत्योदय की भावना के साथ विकास का लाभ प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प सुदृढ़ है। अपनी समृद्ध विरासत और स्वाधीनता संग्राम के आदर्शों को अपनाते हुए हम आधुनिक विकास के मार्ग पर अग्रसर हैं।
अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने महान तेलुगु साहित्यकार गुरजाडा अप्पाराव के एक गीत का उल्लेख किया, जिसका भाव है – अपने देश से प्रेम करो, सर्वहित बढ़ाओ ; देश का अर्थ केवल मिट्टी नहीं बल्कि समस्त जन समुदाय है। राष्ट्रपति ने कहा कि समस्त भारतवासियों का विकास और कल्याण ही विकसित भारत के निर्माण का वास्तविक लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि समाज की भागीदारी और सरकार के प्रयासों से हर गांव, हर नगर और देश के कोने कोने के लोग स्वस्थ सुखी और समृद्ध बनेंगे। राष्ट्रपति ने इसी सर्वसमावेशी भावना से राष्ट्रीय साधना में स्वयं को समर्पित करने का अह्वान किया।
